जनसंख्या के हिसाब से काफी कम होने के बावजूद भारत का यहूदी समुदाय प्राचीन काल से लेकर अब तक भारतीय विरासत के रंगढंग में पूरी तरह से रचा-बसा हुआ है। इनका योगदान न सिर्फ भारतीय कला, विज्ञान और राजनीति के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि भारतीय मूल्यों के सह-अस्तित्व के लिए एक श्रद्धांजलि है। हम आपको नई दिल्ली स्थित आईजीएनसीए में आयोजित प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, जहां आपको भारत के बहुसंस्कृतिवाद और नैतिकता के कई पहलुओं से परिचय होने का अवसर प्राप्त होगा।
भारत के साथ यहूदियों के संबंधों की गाथा
भारत के साथ यहूदियों के संबंधों की गाथा

आयोजन स्थल – ट्वीन आर्ट गैलरी, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फोर द आर्ट्स (आईजीएनसीए), 1, सेंट्रल विस्टा (सीवी) मेस, जनपथ, नई दिल्ली-110001

समय – 5 फरवरी से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक, सुबह 11 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक प्रवेश – निःशुल्क

शिरि होदुः भारत में यहूदियों की गाथा का उत्सव

भारत में इजरायल के राजदूत डेनियल कारमोन और भारत के विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने 5 फरवरी को आईजेनसीए में भारत के यहूदियों की कला, संस्कृति और विरासत पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। भारत में यहूदियों की गाथा पर यहां 6 फरवरी को एक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें जेरुसलेम स्थित शलोम हार्टमैन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता व तेल अवीव यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ कॉम्पैरटिव रिलिजन के प्रोफेसर डॉ. तोमर पर्सिको मुख्य वक्ता थे। उन्होंने भारतीय प्रेरणा और सांस्कृतिक रूपांतरण पर अपने विचार रखे।
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न्यूज़ टेक कैफ़े

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