पौराणिक कथानुसार लंकापति रावण ने अपनी अपार शक्ति से न केवल देवताओं का राज्य छीन लिया बल्कि उसने सभी ग्रहों को भी कैद कर लिया था।

जब मेघनाद का जन्म होने वाला था तब रावण ने सभी ग्रहों को उनकी उच्च राशि में स्थापित होने का आदेश दिया।रावण की यह इच्छा थी कि उसका होने वाला पुत्र ऐसे ग्रह-नक्षत्रों में जन्म ले जिससे कि वह महा-पराक्रमी, कुशल योद्धा और तेजस्वी बने।
शनि की टेड़ी चाल का कारण
शनि की टेड़ी चाल का कारण

उसके भय से ग्रस्त ग्रहों को भविष्य में घटने वाली घटनाओं को लेकर बड़ी चिंता सताने लगी। पर मेघनाद के जन्म के ठीक पहले शनि देव ने अपनी राशि बदल दी। इस कारण मेघनाद अपराजेय व दीर्घायुवान नहीं हो सका।
रावण ने क्रोध में आकर शनि के पैर पर गदा से प्रहार किया।

इस कारण शनि की चाल में लंगड़ाहट आ गई।
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न्यूज़ टेक कैफ़े

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