वर्तमान के आपाधापी वाले जीवन में समय के अभाव एवं भोजन की बदलती हुई आदतों के कारण डिब्बाबंद प्रसंस्कृत भोजन एवं पेय पदार्थों का प्रचलन हमारे देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । वर्तमान में भोजन की समग्र अवधारणा ही पूर्णत: बदल गई है । कृषि पर आधारित फूड टेक्नोलॉजी (खाद्य प्रौद्योगिकी) ने रोजगार एवं कॅरियर के काफी अच्छे एवं उजले अवसर खोल दिए हैं । इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगभग ढ़ाई लाख से अधिक रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं ।

दिन-प्रतिदिन आबादी विद्युत गति से बढ़ती जा रही है तथा खेती की भूमि निरंतर कम होती जा रही है । इससे उत्पादन एवं उपभोग के बीच अंतर बढ़ता ही जा रहा है । इस अंतर को फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग का इस्तेमाल कर कम किया जा सकता है । फूड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बहुत बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की प्रोसेसिंग कर उन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है तथा बेहतर गुणवत्ता और पोषक तत्वों से युक्त भोज्य सामग्री बाजार में उपभोग हेतु उपलब्ध कराई जा सकती है ।

इससे रोजगार के अवसरों में भी भारी वृद्धि होगी । विकसित देशों की तुलना में भारत में फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग उद्योग तुलनात्मक रूप से पिछड़ा हुआ है ।

फूड टेक्नोलॉजी में कॅरियर | Career in Food Technology
फूड टेक्नोलॉजी में कॅरियर | Career in Food Technology
यूँ तो हमारे देश में फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग उद्योग सदियों पुराना है । प्राचीनकाल से ही महिलाएँ घरों में अचार-मुरब्बा,अमचूर आदि का निर्माण करती रही हैं परंतु यह अभी भी कुटीर उद्योग ही है । परंतु अब धीरे-धीरे विश्व के साथ कदमताल करते हुए आधुनिक तकनीक वाली फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग इकाइयाँ हमारे देश में लगाई जा रही हैं । इन इकाइयों से उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता विश्व कोटि की होती है ।

मूल्य संवर्धित वनस्पतियों, सब्जियों , फलों, मवेशी उत्पादों के प्रसंस्कृत स्वरूप के निर्यात की भारत में बहुत संभावनाएँ हैं। डेयरी उत्पाद, मांस, पोल्ट्री उत्पाद तथा समुद्री उत्पादों की भी विदेशों में बहुत भारी माँग है। दुग्ध उत्पादन में तो भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। सऒजियों के उत्पादन में भी भारत का विश्व में पहला और फलों के उत्पादन में दूसरा स्थान है। विश्व के आम उत्पादन का पचास प्रतिशत भारत में होता है । यदि फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग का समुचित प्रयोग किया जाए तो भारत इस क्षेत्र में विश्व का सिरमौर बनने की क्षमता रखता है ।

किसी भी फूड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रशिक्षित फूड टेँक्नोलॉजिस्ट का होना बेहद जरूरी है । फूड टेँक्नोलॉजिस्ट समुचित टेँक्नोलॉजियों का इस्तेमाल करके कम लागत पर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पाद तैयार करते हैं । फूड टेँक्नोलॉजिस्ट् को उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन और खरीद जैसे भिन्न-भिन्न कार्य करने होते हैं । भारत में प्रतिवर्ष बड़ी भारी संख्या में अंतरराष्ट्रीय स्तर के फूड टेँनोलॉजिस्ट् तैयार हो रहे हैं

प्रसिद्ध कॉलेज


सीएफटीआरआई, मैसूर खाद्य अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी संस्थान है । देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों एवं सामान्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी खाद्य उद्योग की जरूरतें पूरी करने के लिए बी.टैक./बी.एससी./एम. टैक./एम.एससी. और पीएच.डी. फूड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम संचलित किए जा रहे हैं।
विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा फूड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश, प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रदान किया जाता है । सीएफटीआरआई, मैसूर अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है । राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर उपाधि की पच्चीस प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर भरी जाती हैं ।

पात्रता एवं शर्ते

बी.टैक/बी.एससी. पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु विज्ञान (फिजिँक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स/बॉयोलॉजी) में बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है एम. टैक. पाठ्यक्रम के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी/कृषि/रसायन इंजीनियरी में बी.टैक. तथा एम. एससी. फूड टेक्नोलॉजी के लिए फिजिँक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स/लाइफ साइंस में बी.एससी./कृषि/फूड टेक्नोलॉजी में बी.एससी. परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए ।

फूड टेक्नोलॉजिस्टों हेतु करियर की काफी उजली संभावनाएँ व्याप्त हैं । फूड टेक्नोलॉजिस्टों को विभिन्न संगठनों में अच्छा रोजगार दिया जाता है । इनमें सरकारी, सहकारी तथा विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ शामिल हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्टों को बीआईएस-एग्मार्क इंस्पेँकटरों, खाद्य इंस्पेँकटर, आदि के रूप में भी नियुक्त किया जा रहा है । प्राइवेट और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ हैं । विनिर्माण घरानों से लेकर विपणन घरानों तक में फूड टेक्नोलॉजिस्टों हेतु रोजगार की ढेरों संभावनाएँ हैं।
Axact

न्यूज़ टेक कैफ़े

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