निर्देश (1-10): नीचे दिए गए परिच्छेद मेंकुछ रिक्त स्थान छोड़ दिए गए हैं तथा उन्हें प्रश्न संख्या से दर्शाया गया है| ये संख्याएं परिच्छेद के नीचे मुद्रित हैं, और प्रत्येक के सामने (1), (2), (3), (4) और (5) विकल्प  दिए गए हैं| इनमें से कोई एक एस रिक्त स्थान को पूरे परिच्छेद के सन्दर्भ में उपयुक्त ढंग से पूरा कर देता है| आपको उस विकल्प को ज्ञात करना है, और उसका क्रमांक ही उत्तर के रूप में दर्शाना है| दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त का चयन करना है|

भाषा संस्कृति का (--1--) होती है। प्रत्येक सांस्कृतिक परियोजना अपने लिए एक नई भाषा गढ़ती है। नक्सलवादियों की भाषा वह नहीं है जिसका इस्तेमाल गांधी और जवाहरलाल करते थे। आज के विज्ञापनों की भाषा भी वह नहीं है जो 80 के दशक तक हुआ करती थी। यह एक नई संस्कृति है जिसके पहियों पर आज की पत्रकारिता चल रही है। इसे मुख्य रूप से सुखवाद की संस्कृति कह सकते हैं, जिसमें किसी (--2--) वाद के लिए जगह नहीं है। इस संस्कृति का केंद्रीय सूत्र रघुवीर सहाय बहुत पहले बता चुके थे-उत्तम जीवन दास विचार। जैसे दिल्ली के प्रगति मैदान में उत्तम जीवन (गुड लिविंग) की प्रदर्शनियाँ लगती हैं, वैसे ही आज हर अखबार उत्तम जीवन को अपने ढंग से परिभाषित करने लगा है। अपने-अपने ढंग से नहीं, अपने ढंग से, जिसका नतीजा यह हुआ है कि सभी अखबार एक जैसे ही नजर आते हैं-सभी में एक जैसे रंग, सभी में एक जैसी सामग्री, विचार-विमर्श का घोर अभाव या नकली तथा सतही चिंताएँ तथा जीवन में (--3--) पाने के लिए एक जैसा शिक्षण अखबार आधुनिकतम जीवन के विश्वविद्यालय बन चुके हैं और पाठक सोचने-समझनेवाला प्राणी नहीं, बल्कि वह विह्वर, जिसमें कुछ भी उड़ेला जा सकता है - बैरंग लौटने की आशंका से निश्चिंत।

इसका असर हिंदी की जानकारी के स्तर पर भी पड़ा है। टीवी चैनलों में उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है जो शुद्ध हिंदी के प्रति (--4--) रखते हैं। प्रथमतः तो ऐसे व्यक्तियों को लिया ही नहीं जाता। ले लेने के बाद उनसे माँग की जाती है कि वे ऐसी हिंदी लिखें और बोलें जो ‘ऑडिएंस’ की समझ में आए। इस हिंदी का शुद्ध या टकसाली होना जरूरी नहीं है। यह (--5--) कम पढ़े-लिखे लोग भी करने लगे हैं कि टीवी के परदे पर जो हिंदी आती है, वह अक्सर गलत होती है। सच तो यह है कि अनेक हिंदी समाचार चैनलों के प्रमुख ऐसे महानुभाव हैं जिन्हें हिंदी (या, कोई भी भाषा) आती ही नहीं और यह उनके लिए शर्म की नहीं, गर्वित होने की बात है। चूँकि अच्छी हिंदी की माँग नहीं है और समाचार या मनोरंजन संस्थानों में उसकी कद्र भी नहीं है, इसलिए हिंदी सीखने की कोई (--6--) भी नहीं है। हिंदी एक ऐसी अभागी भाषा है जिसे न जानते हुए भी हिंदी की पत्रकारिता की जा सकती है।

प्रिंट मीडिया का दुर्भाग्य यह है कि टेलीविजन से प्रतिद्वंद्विता में उसने अपने लिए कोई नई या अलग राह नहीं निकाली, बल्कि वह टेलीविजन का (--7--) करने में लग गया। कहने की जरूरत नहीं कि जब हिंदी क्षेत्र में टेलीविजन का प्रसार बढ़ रहा था, तब तक हिंदी पत्रों की आत्मा आखिरी साँस लेने लग गई थी। पुनर्जन्म के लिए उनके पास एक ही मॉडल था, टेलीविजन की पत्रकारिता। यह मालिक की पत्रकारिता थी। संपादक रह नहीं गए थे जो कुछ सोच-विचार करते और प्रिंट को इलेक्ट्रॉनिक का भतीजा बनने से बचा पाते। अशुद्ध आत्माएँ अपने को शुद्ध माध्यमों से प्रगट नहीं कर सकतीं। सो हिंदी पत्रों की भाषा भी भ्रष्ट होने लगी। पहले जो हिंदी का पत्रकार बनना चाहता था, वह कुछ साहित्यिक (--8--) ले कर आता था। वास्तव में, साहित्य और पत्रकारिता दोनों एक ही काम को भिन्न-भिन्न ढंग से करते हैं, फिर भी साहित्य चैबीस कैरेट का सोना होता है। साहित्य की उस ऊँचाई को सम्मान देने के लिए पहले हिंदी अखबारों में कुछ साहित्य भी छपा करता था। कहीं-कहीं साहित्य संपादक भी होते थे। लेकिन नए वातावरण में साहित्य का ज्ञान एक (--9--) बन गया। साहित्यकारों को एक-एक कर अखबारों से बाहर किया जाने लगा। हिंदी एक चलताऊ चीज हो गई -गरीब की जोरू, जिसके साथ कोई भी कभी भी छेड़छाड़ कर सकता है। यही कारण है कि अब हिंदी अखबारों में अच्छी भाषा पढ़ने का आनंद दुर्लभ तो हो ही गया है, उनसे शुद्ध लिखी हुई हिंदी की माँग करना भी (--10--) लगता है। जिनका हिंदी से कोई लगाव नहीं है, जिनकी हिंदी के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है, जो हिंदी की किताबें नहीं पढ़ते, उनसे यह अपेक्षा करना कि वे हिंदी को सावधानी से बरतेंगे, उनके साथ अन्याय है।
Hindi Language For IBPS RRB 2015 | Clause Test
Hindi Language For IBPS RRB 2015 | Clause Test

प्र.1. (1) मनोरंजन (2) वाहक (3) लेखनी (4) संगिनी (5) प्रेमिका

उत्तरः (2) वाहक

प्र.2. (1) वैचारिक (2) सांसारिक (3) पारिवारिक (4) राजनैतिक (5) सामाजिक

उत्तरः (1) वैचारिक

प्र.3. (1) भाषा (2) शिक्षा (3) ज्ञान (4) सफलता (5) धन

उत्तरः (4) सफलता

प्र.4. (1) लगाव (2) झुकाव (3) प्रेम (4) आदर (5) सरोकार

उत्तरः (5) सरोकार

प्र.5. (1) प्रसंशा (2) मनोरंजन (3) शिकायत (4) व्यंग्य (5) प्रोत्साहन

उत्तरः (3) शिकायत

प्र.6. (1) लालसा (2) प्रेरणा (3) जरूरत (4) मायने (5) लाभ

उत्तरः (2) प्रेरणा

प्र.7. (1) अनुसरण (2) समर्थन (3) परंपरा (4) अनुकरण (5) व्यवहार

उत्तरः (4) अनुकरण

प्र.8. (1) उदाहरण (2) प्रशिक्षण (3) आदर (4) पुस्तक (5) संस्कार

उत्तरः (5) संस्कार

प्र.9. (1) अवगुण (2) सद्गुण (3) सम्मान (4) आधार (5) आवश्यकता

उत्तरः (1) अवगुण

प्र.10. (1) उचित (2) नाजायज (3) तर्कसंगत (4) आनंददायक (5) सम्मानजनक

उत्तरः (2) नाजायज
Axact

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