गद्यांश
मानव विकास की अवस्था का कारण शिक्षा को माना जाता रहा है। विकास के इस क्रम में उसने नए आविष्कार किएनए तरीकों से ज्ञान अर्जित कियानए मानक स्थापित किए। आदिकाल में मानव ने अपने ज्ञान को प्रकृति और अपने अनुभवों से हासिल किया। यहीं से उसने विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण की। कालांतर में गुरूकुलगुरू और आश्रम बनेविद्यालयों का निर्माण किया गया और धीरे-धीरे शिक्षा की वर्तमान पद्धति हमारे सामने आई। पढ़-लिख कर मानव ने अपनासमाज काविज्ञानतकनीक और चिकित्सा आदि का विकास किया। इस शैक्षिक विकास ने जहां एक तरफ समाज का भला कियावहीं एक तरह का परोक्ष नुकसान भी किया।
सबके लिए सहज और सुलभ शिक्षा किसी भी समाज के विकास का अनिवार्य पहलू है। लेकिन सच यह भी है कि पढ़े-लिखे इंसान ने कहीं न कहीं समाज में नुकसान बहुत ज्यादा किया है। पढ़-लिख जाने के बाद कुछ लोगों ने समाज के बनाए प्रतिमानों को विखंडित और उनका ध्वंस किया। यकीनन ऐसे प्रतिमान खत्म कर दिये जाने चाहिए जो समाज को जड़ बना कर रखते हैंपीछे ले जाते हैंविकास की अवधारणा को खंडित करते हैं। लेकिन पढ़े-लिखे बहुत सारे लोगों ने वैसे सामाजिक प्रतिमानों को भी नष्ट कियाजिनके सहारे समाज में एक प्रकार की सामाजिकता बनी हुई थी। एक नकारात्मक पहलू यह भी रहा कि उसने विखंडित प्रतिमानों के स्थान पर ऐसे नए उदाहरण सामने रखेजिनसे समाज में आपसी मतभेद और विद्वेष में बढ़ोतरी हुई जबकि, न्याय किसी भी समाज के सभ्य होने की शर्त है।
शिक्षित वर्गों के बीच पारिवारिकता के माहौल में ह्रास देखने को मिला। आपसी रिश्तों में मर्यादा टूटती दिखी और आधुनिकता के नाम पर फूहड़ता का प्रदर्शन नजर आने लगा। इस नकारात्मकता ने न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं और परिवारों के बीच सहयोग की भावना का क्षरण कियाबल्कि प्रकृति को भी नुकसान पहुंचाया। शिक्षित इंसान ने तर्क-वितर्क के साथ कुतर्क करना भी सीख लिया। उसने धरतीहवापानीमृदावृक्षजीव आदि के महत्त्व को खारिज करना शुरू कर दिया।
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जबकि हम जानते हैं कि हमारे पुरखों ने इन्हें सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए किस तरह की सामाजिक जीवनशैली का विकास किया था। लेकिन कथित पढ़े-लिखे समाज ने सिरे से इसे नकारते हुए प्रकृति का निर्दयता से दोहन कियाजंगलनदियांजीव-जंतुओं आदि को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी तरह का काम उसने परिवार और समाज को विखंडित करने में किया।
कहने का आशय यह नहीं है कि इंसान जब अशिक्षित या कम पढ़ा-लिखा था तो ज्यादा बेहतर था। यहां इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश है कि शिक्षित होने के बाद इंसान ने सही-गलत को अपने नजरिए और स्वार्थ के आईने में देखना शुरू कर दिया है। जहां जिस स्थिति में उसे लाभ दिखता हैवह कदम उसके लिए सही है। बाकी को वह सिरे से गलत कह देता है।
इसी वजह से उसने अपने सिवाय सभी दूसरे व्यक्तियों को नकारने का काम भी किया। नतीजतनआज समाज की भारी भीड़ में भी इंसान खुद को अकेला महसूस करता हैपरिवार के बीच भी अपने आपको गैर-पारिवारिक समझता हैनिराश-हताश महसूस करता है। शिक्षित होने का अर्थ सामाजिक प्रतिमानोंसामाजिकता और पारिवारिकता का विकास करना थान कि इनका नाश करना। इंसान विकास के बीच अगर इंसानियतन्याय आधारित सामाजिकता और पारिवारिकता का भी विकास कर पाए तो उसका शिक्षित होना सही मायनों में सफल सिद्ध होगा।


प्र.1. आज के समाज की भारी भीड़ में इंसान खुद को अकेला क्यों महसूस करता है?
(1) क्योंकि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा है।
(2) क्योंकि वह सही-गलत का निर्णय अपने स्वार्थ के आधार पर करता है।
(3) क्योंकि कम पढ़ा-लिखा इंसान ज्यादा बेहतर होता है।
(4) क्योंकि वह दूसरे लोगों को नकार देता है।
(5) क्योंकि वह पुरानी सामाजिक जीवन शैली को स्वीकार नहीं करता है।


उत्तरः(2) क्योंकि वह सही-गलत का निर्णय अपने स्वार्थ के आधार पर करता है।


प्र.2. गद्यांश के अनुसारशिक्षित लागों द्वारा किए जाने वाले नकारात्मक कृत्य निम्न में से कौन से हैं?
(क) सामाजिक प्रतिमानों का नाश               
(ख) विद्वेषपूर्ण प्रतिमानों की स्थापना             
(ग) विकास की अवधारणा का खंडन करने वाले प्रतिमानों का नाश
(घ) न्यायपरायणता को जीवंत रखने वाले प्रतिमानों का ह्रास
(1) केवल क और ख
(2) केवल ख और ग
(3) केपल क और ग
(4) केवल ग और घ
(5) ग के अतिरिक्त सभी


उत्तरः(5) ग के अतिरिक्त सभी।


प्र.3. समाज में आपसी मतभेद और विद्वेष में वृद्धि का कारण क्या है?
(1) क्योंकि शैक्षिक विकास से समाज का नुकसान हुआ है।
(2) क्योंकि समाज के बनाए प्रतिमान विखंडित हो चुके हैं।
(3) क्योंकि समाज में आपसी रिस्तों की मर्यादा समाप्त हो चुकी है।
(4) क्योंकि शिक्षित इंसान तर्क-वितर्क के साथ कुतर्क करना भी सीख गया है।
(5) क्योंकि विखंडित प्रतिमानों के स्थान पर अन्याय पूर्ण उदाहरण पेश किए गए।


उत्तरः (5) क्योंकि विखंडित प्रतिमानों के स्थान पर अन्याय पूर्ण उदाहरण पेश किए गए।


प्र.4. गद्यांश के आधार परविकास के क्रम में मानव ने निम्न में से कौन सा कार्य नहीं किया है?
(क) नए आविष्कार               
(ख) नए तरीकों से ज्ञान की प्राप्ति
(ग) विकास की अवधारणा का खंडन
(1) केवल क
(2) केवल ग
(3) केवल ख
(4) केवल क और ग
(5) केवल क और ख


उत्तरः(2) केवल ग


प्र.5. उपरोक्त गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(1) शैक्षिक विकास ने समाज का परोक्ष रूप से नुकसान किया है।
(2) शिक्षित होने के साथ ही मानव समाज की तर्क-क्षमता बेहतर हो गई है।
(3) नकारात्मक भावनाओं से केवल प्रकृति का नुकसान हुआ है।
(4) अशिक्षित या कम पढ़ा लिखा समाज ज्यादा बेहतर होता है।
(5) शिक्षित होने के बावजूद कुछ लोग सही-गलत को स्वार्थ के आईने में देखते हैं।


उत्तरः(5) शिक्षित होने के बावजूद कुछ लोग सही-गलत को स्वार्थ के आईने में देखते हैं।


प्र.6. हमारे पुरखों ने प्रकृति को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए किस तरह की जीवनशैली का विकास किया था?
(1) सामाजिक जीवन शैली
(2) अशिक्षित जीवन शैली
(3) प्रतिमान आधारित जीवन शैली
(4) 1 व 2 दोनों
(5) सभी 1, 2 व 3
उत्तरः(1) सामाजिक जीवन शैली


पर्यायवाची


प्र.7. पद्धति


(1) अनुष्ठान         (2) संस्कार          (3) प्रणाली     (4) विधि            (5) नियम


उत्तरः(3) प्रणाली


प्र.8. प्रतिमान


(1) आदर्श           (2) प्रतिरूप          (3) नमूना     (4) मिसाल          (5) मॉडल


उत्तरः(1) आदर्श


विलोम


प्र.9. अनिवार्य


(1) सुगम            (2) दुष्कर           (3) निवार्य           (4) साध्य     (5) वैकल्पिक


उत्तरः(5) वैकल्पिक


प्र.10. क्षरण


(1) दुर्बल             (2) पोषण           (3) विकास          (4) प्रोत्सहन   (5) नीरस


उत्तरः(2) पोषण
Axact

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