भारतीय टीवी चैनलों पर प्रसारित धारावाहिकों पर साफ निशाना साधते हुए बॉलीवुड के जानेमाने फिल्म निर्माता अनुराग बसु ने कहा है कि रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों के मुख्य स्त्री पात्रों के सही व गलत का नजरिया आज के टीवी धारावाहिकों के मुख्य पात्रों के सही व गलत की सोच से कहीं ज्यादा प्रगतिशील है।

बसु ने अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से हुई एक बातचीत में बताया, “कहानियों में गजब की लैंगिक समानता का भाव है। यह बात बिना शोर मचाए अपने-आप आ जाती है। मैं सामान्यीकरण नहीं करना चाहता। लेकिन मैं टेलिविज़न पर जो भी देखता हूं, मैंम अक्सर पात्रों की हरकत सवाल उठा बैठता हूं: वो अपनी आवाज़ क्यों नहीं उठा रही, वो क्यों दरवाजा अंदर से बंद करके रो रही है? बसु टैगोर की कहानियों को टीवी के लिए ढालने पर बात कर रहे थे।
Rabindranath Tagore Stories Epic Tv Show By Anurag Basu
 यह एडाप्टेशन वे ऐतिहासिक काल खंडों पर केंद्रित चैनल एपिक के लिए कर रहे हैं। चैनल रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों पर आधारित और बसु द्वारा निर्देशित नया शो लॉन्च करने जा रहा है।

यह सीरीज़ सोमवार, 6 जुलाई से प्रसारित किए जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 शो में ‘बिनोदिनी’, ‘चारुलता’, ‘अतिथि’ और ‘काबुलीवाला’ सहित टैगोर की कुछ उत्कृष्ट कृतियां पेश की जाएंगी। राधिका आप्टे को बिनोदिनी की भूमिका के लिए चुना गया है। वहीं अमृता पुरी को ‘चारुलता’ में पहली बार टीवी पर देखा जाएगा।

बसु ने मीडिया संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि टैगोर हमेशा उनकी प्रेरणा रहे हैं। उनका कहना था, “मैं करीब एक दशक से उनके जादू को छोटे परदे के लिए रचना चाहता था। यह शो दर्शकों को महान पात्रों के साथ पुराने बंगाल की जादुई यात्रा पर ले जाने को तैयार है, ठीक उसी तरह जैसे टैगोर ने सारा कुछ अपनी कहानियों में लिखा है।”

 टैगोर से शुरुआती जुड़ाव के बारे में बसु ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब मैं छोटा था तो रवींद्र संगीत इतना ज्यादा आम था कि मैंने समझे बिना उससे नफरत करने लगा। जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने टैगोर को पाया। चूंकि हम भिलाई (छत्तीसगढ़) में रहा करते थे, पश्चिम बंगाल में नहीं तो मेरी मां मुझे बंगाली संस्कृति के करीब लाने के लिए तमाम छोटी-छोटी बातें करती थी। इनमें से एक था मुझे बंगाली साहित्य पढ़ाना।

अंततः मैंने टैगोर के नाटकों को पढ़ना शुरू किया। लेकिन उनकी सारी कहानियां मैंने दस साल पहले तब पढ़ीं, जब मैं टेलिविज़न के लिए ‘थ्रिलर ऐट 10′ और ‘लव स्टोरी’ जैसे शो बना रहा था। तभी मैं उनकी रचनाओं को एडाप्ट करने के बारे में सोचा।” उन्होंने आगे कहा कि टैगोर के पात्र इतनी अच्छी तरह से परिभाषित हैं कि एपिक चैनल की सीरीज़ ‘स्टोरीज़ बाय रवींद्रनाथ टैगोर’ पर काम करने ने उन्हें बेहतर पटकथा लेखक बना दिया है।

उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, ‘चोखेर बाली’ मेंबिनोदिनी का आप कैसे वर्णन करोगे? वहउजली, सांवलीयाकाली है? हम नहीं जानते। वह एकयौन स्तर पर एक दमितविधवाहै। वहबदलालेना चाहती हैऔर ठीक उसी समय किसी के साथगहराईसे प्यार में डूबी है।” हालांकि पूरी कोशिश के बावजूद समय और बजट की कमी के कारण बसु पूरी तरह कहानियों का टैगोर जैसा चित्रण नहीं कर पाए।

उन्होंने अखबार को बताया, “जब हम क्लासिक बांग्ला कहानियों की शूटिंग करते हैं, आमतौर पर हम एक ही जैसे जमींदारों के विशाल घर चुनते हैं। मुझे लगता है कि यह ज़रूरी नहीं है। तो उत्तरी बंगाल में मैंने दोर्स के पास शूटिंग की है। वहां लकड़ी के मकान हैं, टॉय ट्रेन और घोड़ा गाड़ी है। वहां रंग सीपिया नज़र आता है। मैं बंगाल की विशालता को शूट करना चाहता था। पर मैं वह कर नहीं पाया क्योंकि टीवी के माध्यम में समय और बजट की कमी होती है।”
Source:-Televisionpost
Axact

न्यूज़ टेक कैफ़े

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