प्र.1-10. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

गाँधीजी बैरिस्ट्री पढ़कर नौकरी के लिए दक्षिण अफ्रीका गए और वापस आकर आज़ादी की लड़ाई के लिए नेतृत्व किया। वे अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरा प्रयोग’ में विद्यार्थियों के लिए सत्य, अहिंसा आदि का पाठ देते हैं। साथ ही स्वस्थ्य, सुन्दर अक्षरों में लिखने की आवश्यकता, संस्कृत भाषा का महत्व आदि के बारे में कहते हैं। अपनी आत्मकथा में गाँधीजी कहते हैं कि पढ़ाई में मैं बेवकूफ नहीं था। उस जमाने में स्कूलों से छात्रों के चरित्र, पढ़ाई आदि के सम्बन्ध में प्रमाणपत्र घर को भेजे जाते थे। मेरे बारे में कोई आपत्ति ऐसे पत्रों में नहीं थी।

पाँचवीं और छठवीं क्लास में पढ़ते समय मुझे स्कॉलरशिप मिली थी। इसे मैं ईश्वर की कृपा मानता था। पुरस्कार व स्कॉलरशिप मिलते समय मुझे संतोष होता था।

मेरे चरित्र पर मुझे बड़ा ध्यान था। मेरे बारे में किसी अध्यापक को कोई आपत्ति होती तो मुझे बड़ा दुःख होता। मुझे एक दो बार स्कूल में मार पड़ी थी। मैं मार की वेदना से ऊपर दण्ड से दुखी था। उस पर मैं खूब रोया था। हमारे हेडमास्टर जी दोरावजी एदलजी गीमी थे। वे छात्रों से प्यार करते थे, अच्छी तरह पढ़ाते थे, लेकिन अनुशासन पर कड़े थे। वे छात्रों के लिए व्यायाम को अनिवार्य मानते थे। मैं व्यायाम करने नहीं जाता था। मुझे व्यायाम से दूर रहने के कारण कोई दुःख नहीं था। क्योंकि मैं हर रोज़ ज्यादा पैदल जाता था। स्कूल से आकर पिताजी की सेवा करता था। व्यायाम से मैंने छूट माँगा था लेकिन हेडमास्टर ने नहीं माना।

वह शनिवार का दिन था। दोपहर तक क्लास थी। शाम को व्यायाम भी था। आकाश बादल से आवृत था। मेरे पास घड़ी नहीं थी। समय के बारे में कोई पता नहीं था। व्यायाम के लिए स्कूल पहुँचने में देरी हुई। अगले दिन हेडमास्टर ने रजिस्टर देखा तो मैं पकड़ा गया। उनके पूछने पर मैं ने वास्तविक कारण कहा। उन्होंने विश्वास नहीं किया। इस पर मुझे जुमार्ना हो गया। मुझे दुःख जुर्माने पर नहीं था बल्कि हेटमास्टर ने मुझे झूठा समझा था, दुख उस पर हुआ था। व्यायाम के बदले मैं ने पैदल जाना जारी रखा।

मुझे सुलेख नहीं आया था। मैं ने सोचा था कि शिक्षा के लिए सुलेख अनिवार्य नहीं है। लेकिन जब मैं दक्षिण अफ्रीका गया वहाँ वकीलों का सुलेख देखकर मैं स्वयं शरमा गया। मेरा मत है कि छात्रों को सुलेख आने के लिए चित्रकला सीखनी चाहिए।

संस्कृत भाषा मुझे पचती नहीं थी। लेकिन फारसी मेरे वश में आयी थी। उस्ताद भला था। वे एक दिन ज्यादा नहीं पढ़ाते थे। मैं ने संस्कृत को छोड़ा। एक दिन संस्कृत के मास्टर कृष्णशंकर ने मुझे उपदेश दिया कि संस्कृत पढ़ें। मैं ने माना। आज मैं कृष्णशंकर मास्टर के प्रति कृपावान हूँ जिन्होंने संस्कृत पढ़ने और उसके साहित्य का आस्वादन करने की प्रेरणा दी।

छह साल की उम्र से लेकर सोलह साल की उम्र तक स्कूल में शिक्षा मिली। लेकिन नैतिक व धार्मिक शिक्षा नहीं मिली। मेरी राय में उसकी आवश्यकता है। नैतिकता का पाठ मुझे दाई से मिला। उन्होंने मुझे भूत-प्रेत के डर से मुक्ति के लिए राम-नाम का जप करने को कहा। बच्चों के सही रास्ते पर चलने के लिए नैतिक शिक्षा अनिवार्य है।
Hindi Language For RRBs-CWE-IV PO / Clerk Exam 2015
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प्र.1. गद्यांश के अनुसार, ‘‘सत्य के साथ मेरा प्रयोग’’ में गाँधीजी ने क्या करने की सलाह नहीं दी है?
(1) सत्य, अहिंसा का पालन करने की            
(2) सुलेख लिखने की
(3) व्यायाम करने की
(4) नैतिक शिक्षा प्राप्त करने की
(5) संस्कृत पढ़ने की

उत्तरः (3) व्यायाम करने की

प्र.2. व्यायाम के स्थान पर गाँधी जी क्या करते थे?
(1) योग करते थे।            
(2) प्राणायाम करते थे।
(3) तैराकी करते थे।
(4) पैदल चलते थे।
(5) कबड्डी खेलते थे।

उत्तरः (4) पैदल चलते थे

प्र.3. सुलेख पर गाँधी जी की राय क्या है?
(1) अच्छे सुलेख के लिए संस्कृत सीखनी चाहिए            
(2) अच्छे सुलेख के लिए चित्रकला सीखनी चाहिए
(3) अच्छे सुलेख के लिए व्यायाम करना चाहिए
(4) अच्छे सुलेख के लिए प्राणायाम करना चाहिए
(5) अच्छे सुलेख के लिए फारसी सीखनी चाहिए

उत्तरः (2) अच्छे सुलेख के लिए चित्रकला सीखनी चाहिए।

प्र.4. व्यायाम में अनुपस्थित रहने पर हेडमास्टर ने गाँधी जी को कौन-सी सजा दी थी?
(1) पिटाई की थी।            
(2) स्कूल आने से मना कर दिया था।
(3) जुर्माना लगाया था।
(4) पैदल चलने को कहा था।
(5) संस्कृत सीखने को कहा था।

उत्तरः (3) जुर्माना लगाया था।

प्र.5. गाँधीजी दण्ड से क्यों दुःखी हो गए थे?
(1) क्योंकि उनके पास जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं थे।
(2) क्योंकि हेडमास्टर ने उनकी वास्तविक बात पर विश्वास नहीं किया।
(3) क्योंकि हेडमास्टर ने जरूरत से ज्यादा दण्ड दे दिया था।
(4) क्योंकि उनके माता पिता ने उन्हें कभी दण्डित नहीं किया था।
(5) क्योंकि शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद भी उन्हें दण्डित किया गया था।

उत्तरः (ख) क्योंकि हेडमास्टर ने उनकी वास्तविक बात पर विश्वास नहीं किया।

प्र.6. कृष्णशंकर मास्टर कौन थे?
(1) संस्कृत के अध्यापक थे।
(2) फारसी के अध्यापक थे।
(3) स्कूल के हेडमास्टर थे।
(4) व्यायाम के अध्यापक थे।
(5) नैतिक शिक्षा के अध्यापक थे।

उत्तरः (1) संस्कृत के अध्यापक थे।

प्र.7. शिक्षा के लिए गाँधीजी क्या अनिवार्य मानते थे?
(1) संस्कृत की शिक्षा
(2) चित्रकला की शिक्षा
(3) नैतिक व धर्म की शिक्षा
(4) व्यायाम का अभ्यास
(5) राम नाम का जप करना

उत्तरः (3) नैतिक व धर्म की शिक्षा

प्र.8. गाँधी जी को नैतिक शिक्षा किसने दी थी?
(1) संस्कृत के मास्टर कृष्णशंकर ने
(2) हेडमास्टर दोरावजी एदलजी गीमी ने
(3) फारसी के उस्ताद ने
(4) दाई रम्भा ने
(5) माता पिता ने

उत्तरः (4) दाई रम्भा ने

प्र.9. गद्यांश के अनुसार, शब्द ‘‘छूट’’ को किस अर्थ में प्रयोग किया गया है?   
(1) स्वतंत्रता
(2) ढील
(3) अनुमोदन
(4) राहत
(5) माफी

उत्तरः (2) ढील

प्र.10. गद्यांश के अनुसार, शब्द ‘‘पचती’’ का विपरीत अर्थ वाला शब्द कौन सा है?   
(1) उपेक्षा
(2) अपनिर्वचन
(3) परिहार
(4) निवारण
(5) मोचन
उत्तरः (3) परिहार
Axact

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